50 + चाणक्य नीति | Chanakya Neeti Collection

Ram Gupta

Acharya Chanakya कौन थे ?

Acharya Chanakya को कौन नहीं जानता है। आचार्य चाणक्य एक ऐसे महान विभूति थे। जिन्होंने अपने बुद्धि-विवेक से भारतीय इतिहास की धारा को बदल कर रख दिया।‌chanakya को लोग कौटिल्य के नाम से भी जानते हैं। का असली नाम विष्णु गुप्त था। उनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी शिक्षा तक्षशीला से हासिल की थी। आचार्य चाणक्य चंद्रगुप्त के महामंत्री थे। ‌ आचार्य चाणक्य एक महान दार्शनिक , लेखक , कूटनीतिज्ञ , शिक्षक अर्थशास्त्री , राजनीतिक थे। आचार्य चाणक्य ने ही सबसे पहले अखंड भारत की स्थापना की थी। आचार्य चाणक्य ने मगध में पाटलिपुत्र में नंद वंश को जड़ से उखाड़ फेंकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 

चाणक्य-नीति-Chanakya-Neeti

मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ, प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में भी विश्वविख्‍यात हुए। इतनी सदियाँ गुजरने के बाद आज भी यदि चाणक्य के द्वारा बताए गए सिद्धांत और नीतियाँ प्रासंगिक हैं।‌ तो मात्र इसलिए क्योंकि उन्होंने अपने गहन अध्‍ययन, चिंतन से अर्जित अमूल्य ज्ञान को पूरी तरह नि:स्वार्थ होकर मानवीय कल्याण के उद्‍देश्य से अभिव्यक्त किया। तो चलिए आचार्य चाणक्य के सिद्धांतों और नीतियों को जानते हैं। 


1. जो धातु धातु बिना गर्म किये मुड जाती है, उसे आग में नहीं तपाते। जो काठ स्वयं झुका होता है, उसे कोई झुकाने का प्रयत्न नहीं करता, अतः बुद्धिमान पुरुष को अधिक बलवान के सामने झुक जाना चाहिये।

2. जो किसी दुर्बल का अपमान नहीं करता, सदा सावधान रहकर शत्रु से बुद्धि पूर्वक व्यवहार करता है, बलवानों के साथ युद्ध पसंद नहीं करता तथा समय आने पर पराक्रम दिखाता है, वही धीर है।

3. ये दो आदतें नुकीले कांटे की तरह शरीर को बेध देती है:
1. गरीब होकर भी कीमती वस्तुओं की इच्छा रखना |
2. कमजोर होकर भी गुस्सा करना।

4. ये 6 सुख हैं :
नीरोग रहना, ऋणी न होना, परदेश में न रहना, अच्छे लोगों के साथ मेलजोल रखना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना और निडर होकर रहना।

5.  6 प्रकार के मनुष्य हमेशा दुखी रहते हैं:
ईर्ष्या करने वाला, घृणा करने वाला, असंतोषी, क्रोधी, शक करने वाला और दूसरों के सहारे जीवन निर्वाह करने वाला।

6. ये लोग धर्म नहीं जानते :
नशे में धूत, असावधान, पागल, थका हुआ, क्रोधी, भूखा, जल्दबाज, लालची, डरा हुआ व्यक्ति और कामी।

7. सुखी जीवन के सूत्र :
दोस्तों से मेलजोल, ज्यादा धन कमाना, पुत्र का आलिंगन, सही समय पर प्रिय वचन बोलना, अपने वर्ग के लोगों में उन्नति, अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति और समाज में सम्मान।

8. मनुष्य को कभी भी सत्य, दान, कर्म क्षमा तथा धैर्य – इन पांच गुणों का त्याग नहीं करना चाहिए।

9. काम, क्रोध, और लोभ – ये आत्मा का नाश करने वाले नरक के तीन दरवाजे हैं, अतः इन तीनो को त्याग देना चाहिए।

10. विदुर धृतराष्ट्र से कहते हैं : राजन ! ये दो प्रकार के पुरुष स्वर्ग के भी ऊपर स्थान पाते हैं – शक्तिशाली होने पर भी क्षमा करने वाला और निर्धन होने पर भी दान देनेवाला ।

11. किसी धनुर्धर वीर के द्वारा छोड़ा हुआ बाण संभव है किसी एक को भी मारे या न मारे। मगर बुद्धिमान द्वारा प्रयुक्त की हुई बुद्धि राजा के साथ-साथ सम्पूर्ण राष्ट्र का विनाश कर सकती है।

12.  मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।

आचार्य चाणक्य के अनमोल विचार 


13.  जो बहुत धन, विद्या तथा ऐश्वर्यको पाकर भी इठलाता नहीं चलता, वह पंडित कहलाता है।

14. मूढ़ चित्त वाला नीच व्यक्ति बिना बुलाये ही अंदर चला आता है, बिना पूछे ही बोलने लगता है तथा जो विश्वाश करने योग्य नहीं हैं उनपर भी विश्वाश कर लेता है।

15. ईर्ष्या करने वाला, घृणा करने वाला, असंतोषी, क्रोधी, सदा संकित रहने वाला और दूसरों के भाग्य पर जीवन-निर्वाह करने वाला – ये छः सदा दुखी रहते हैं।

16. सही तरह से कमाए गए धन के दो ही दुरुपयोग हो सकते हैं :- अपात्र को दिया जाना, सत्पात्र को न दिया जाना

17. जिस धन को अर्जित करने में मन तथा शरीर को क्लेश हो, धर्म का उल्लंघन करना पड़े, शत्रु के सामने अपना सिर झुकाने की नौबत आयें , उसे प्राप्त करने का विचार ही त्याग देना चाहिए।

18. ये दो प्रकार के पुरुष स्वर्ग से भी ऊपर स्थान पाते हैं :- शक्तिशाली होने पर भी क्षमा करने वाला, गरीब होकर भी दान करने वाला।

19.. जब ये चार बातें होती हैं तो व्यक्ति की नींद उड़ जाती है, 1- काम भावना जाग जाने पर 2- खुद से अधिक बलवान व्यक्ति से दुश्मनी हो जाने पर 3- यदि किसी से सब कुछ छीन लिया जाए 4- किसी को चोरी की आदत पड़ जाए।

20. मुर्ख की यह प्रव्रत्ति है कि वह सदैव उन लोगों का अपमान करता है जो विद्या, शील, आयु। बुद्धि, धन और कुल में श्रेष्ट हैं तथा माननीय हैं।

21. मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद  को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।

22. बुद्धिमान व्यक्ति के प्रति अपराध कर के कोई दूर भी चला जाए तो चैन से न बैठे, क्योंकि बुद्धिमान व्यक्ति की बाहें लंबी होती है और समय आने पर वह अपना बदला लेता है।

23. बुद्धिमान तथा ज्ञानी लोग दुर्लभ वस्तुओं की कामना नहीं रखते, न ही खोयी हुए वस्तु के विषय में शोक करना चाहते हैं तथा विपत्ति की घडी में भी घबराते नहीं हैं।

24. बुद्धि, कुलीनता, इन्द्रिय-निग्रह, शास्त्रज्ञान, पराक्रम, अधिक न बोलना, शक्ति के अनुसार दान और कृतज्ञता – ये आठ गुण पुरुष की ख्याति बढ़ा देते हैं।

25. पर-स्त्री का स्पर्श, पर-धन का हरण, मित्रों का त्याग यह तीनों दोष काम, लोभ, और क्रोध से उत्पन्न होते हैं।

 Acharya Chanakya Quotes in Hindi 


26. नीरोग रहना, ऋणी न होना, परदेश में न रहना, अच्छे लोगों के साथ मेल रखना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना और निडर होकर रहना-ये छः मनुष्य लोक के सुख हैं।

26. निम्न दस प्रकार के लोग धर्म को नहीं जानते-नशे में मतवाला, असावधान, पागल, थका हुआ, क्रोधी, भूखा, जल्दबाज, लोभी, भयभीत और कामी।

27. निम्न छः प्रकार के मनुष्य सदा दुखी रहते हैं-ईर्ष्या करने वाला, घृणा करने वाला, असंतोषी, क्रोधी, सदा शंकित रहने वाला और दूसरों के भाग्य पर जीवन-निर्वाह करने वाला – ये सदा दुखी रहते हैं।

28.. जो किसी दुर्बल का अपमान नहीं करता, सदा सावधान रहकर शत्रु से बुद्धि पूर्वक व्यवहार करता है, बलवानों के साथ युद्ध पसंद नहीं करता तथा समय आने पर पराक्रम दिखाता है वही धीर है।

29. जो स्वार्थ तथा अधिक पा लेने की हवस से मुक्त हैं, मैं उन्हें समझदार मानता हूँ क्योंकि संसार में स्वार्थ और हवस ही सारे झंझटों के कारण होते हैं।

30. जो व्यक्ति किसी विषय को शीघ्र समझ लेते हैं, उस विषय के बारे में धैर्य पूर्वक सुनते हैं, और अपने कार्यों को कामना से नहीं बल्कि बुद्धिमानी से संपन्न करते हैं, तथा किसी के बारे में बिना पूछे व्यर्थ की बात नहीं करते हैं वही पण्डित कहलाते हैं।

31. जो दुसरो के धन, सौन्दर्य, बल, कुल, सुख, सौभाग्य व सम्मान से ईष्या करते हैं, वे सदैव दुखी रहते हैं।

32. जिस व्यक्ति के कर्त्तव्य, सलाह और पहले से लिए गए निर्णय को केवल काम संपन्न होने पर ही दुसरे लोग जान पाते हैं, वही पंडित कहलाता है।

33. जिस व्यकित के कर्मों में न ही सर्दी और न ही गर्मी, न ही भय और न ही अनुराग, न ही संपत्ति और न ही दरिद्रता विघ्न डाल पाती हैं वही पण्डित कहलाता है।

34. सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और ।

35. दूसरों के सहारे जीवन निर्वाह करने वाला क्यों कि वह  हमेशा दूसरे के एहसानों के नीचे दबा रहता है।

Acharya Chanakya के प्रेरणादायक विचार 

36. चाणक्‍य नीति के अनुसार अगर दौलत, मित्र, पत्नी और राज्य गंवा दिया जाए तो ये वापस मिल सकते हैं, लेकिन अगर आपको रोग घेर लेते हैं और यदि आप अपनी काया गंवा देते है और ये वापस नहीं मिलेगी।

37. आचार्य चाणक्‍य का मानना है कि किसी को सबसे ज्‍यादा नुकसान उसका राजदार पहुंचा सकता है। इसलिए व्‍यक्ति को कभी भी ऐसे लोगों से नहीं उलझना चाहिए। आचार्य कहते हैं कि विभीषण रावण के राज जानता था और उसने वह राज भगवान राम को बता दिए थे। इस वजह से रावण युद्ध में मारा गया था। इसलिए कभी अपने राजदार से न उलझें।

38. काम वासना मे लिप्त व्यक्ति और दूसरे से इर्ष्या करने वाले व्यक्ति कभी खुश नहीं रह सकता।

39. मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। परिस्थिति चाहे जैसी भी मनुष्य को धैर्य न खोएं। अगर आप ऐसा करते हैं तो आधी लड़ाई आप बिना लड़े ही जीत जाएंगे।

40. लालची व्यक्ति कभी खुश नहीं रह सकता क्योंकि लालच एक ऐसी चीज है जो कभी पूरी नहीं होती है।

41. जो दुसरो के धन, सौन्दर्य, बल, कुल, सुख, सौभाग्य व सम्मान से ईष्या करते हैं, वे सदैव दुखी रहते हैं।

42. आचार्य चाणक्‍य कहते हैं कि इस धरती पर अन्न, जल और मीठे वचन ये ही वास्‍तविक रत्न हैं। मगर मूर्ख लोगों को लगता है कि पत्थर के टुकड़े रत्न हैं। व्‍यक्ति के कर्म जैसे भी हों वे सदा उसके पीछे चलते है।

43. पहले पांच साल अपने बच्चे के साथ दुलारे की तरह व्यवहार करें। अगले पांच साल तक उन्हें डांटो। जब तक वे सोलह वर्ष के नहीं हो जाते, तब तक उनके साथ एक मित्र की तरह व्यवहार करें। आपके बड़े हो चुके बच्चे आपके सबसे अच्छे दोस्त हैं।

44. सच्चा पुत्र आज्ञाकारी होता है, सच्चा पिता प्रेम करने वाला होता है, और सच्चा मित्र ईमानदार होता है।

45. चाणक्‍य नीति कहती है कि ये बातें कभी नहीं छुपती. पानी पर तेल, दुर्जन व्‍यक्ति को बताया हुआ रहस्‍य, एक योग्‍य व्यक्ति को दिया हुआ दान और एक बुद्धिमान व्यक्ति को पढ़ाया हुआ शास्त्रों का ज्ञान अपने स्वभाव के कारण तेजी से फैलते हैं।

Acharya Chanakya के अनमोल वचन 

46. एक मूर्ख व्यक्ति के लिए किताबें उतनी ही उपयोगी होती हैं, जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए आईना।

47. बीमारी, दुर्भाग्य, अकाल और आक्रमण के समय जो कोई भी आपकी सहायता करता है, वही वास्तविक अर्थों में आपका सच्चा भाई है।

48. चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को कभी अपनी पूरी कमाई किसी को नहीं बतानी चाहिए। फिर चाहे वो कितना भी करीबी क्यों न हो। सिर्फ इतना ही नहीं साथ ही अगर किसी के साथ लेन-देन में पैसों का नुकसान हो जाए तो भी बात गुप्त रखें।

49. एक बुद्धिमान व्यक्ति अपने बच्चे को सावधानी से पालता है क्योंकि उच्च मनोबल वाले शिक्षित व्यक्ति को ही समाज में सच्चा सम्मान मिलता है।

50. आपको आपको दान उतना ही करनी चाहिए जिससे आपकी आपकी खुद की आर्थिक स्थिति ना बिगड़े. आपकी आर्थिक स्थिति जीतने की इजाजत दे उतनी ही दान करें.

51. एक अशिक्षित व्यक्ति का जीवन कुत्ते की पूंछ की तरह बेकार है जो न तो उसके पिछले सिरे को ढकती है और न ही कीड़ों के काटने से बचाती है।

52. किसी व्यक्ति की उत्पत्ति का अनुमान उसके व्यवहार से, उसके मूल स्थान का उसके स्वर से, और उसके भोजन के सेवन का अनुमान उसके पेट के आकार से लगाया जा सकता है।

53. एक बार जब आप किसी चीज़ पर काम करना शुरू कर दें। असफलता से डरो मत और उसका परित्याग मत करो। जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं वे सबसे ज्यादा खुश होते हैं।

54. दूसरों की गलतियों से सीखें। आप उन सभी को स्वयं बनाने के लिए पर्याप्त समय तक जीवित नहीं रह सकते। एक अकेला चंद्रमा अंधेरे को दूर करता है, जो कई तारे भी मिलकर नहीं कर सकते। 

55. चाणक्य के अनुसार स्वार्थी व्यक्ति कभी किसी का भला नहीं जा सकता इसलिए आपको इन लोगों से दूर रहना चाहिए। स्वार्थी लोग केवल अपने बारे में सोचते हैं और अपने भलाई के लिए आपको भी जोखिम में डाल सकते हैं। स्वार्थी लोगों से आपको धोखे के अलावा कुछ नहीं मिल सकता।

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