लालच बुरी बला हिन्दी कहानी।

लालच बुरी बला है।
इस घटना को गुजरे बहुत वर्ष बीत गए। यह घटना उस समय की हैं जब आवागमन के और कृषि के आधुनिक साधन उपलब्ध नहीं थे। इस कारण बैलों और ऊंटों के दाम उंचे थे। जिसके घर इन पशुओं की संख्या अधिक होती थी वो साधन संपन्न माना जाता था। सालाना भरने वाला पशु मेला भरपूर भरता था। राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तिलवाडा पशु मेला उन दिनों उफान पर रहता था। हजारों व्यापारी अन्य राज्यों से पशु क्रय करने आते थे। पशुओं की संख्या तो अनगिनत होती थी। पूरे पन्द्रह दिन रेलमपेल रहती थी। चांद को देखकर व्यापारी पशु खरीदना शुरू कर देते थे। लाखों का कारोबार होता था। मेले में सुई से लेकर तलवार तक सब काम में आने वाली चीजें मिलती थी।

किसान वर्ग इसी मेले में पशु बेचकर अपनी जरूरत के मुताबिक सामान खरीदते थे। बाकी बचे हुए रुपये अंटी में छिपाकर लौट जाते थे। अधिकतर लोगों को पैदल ही लौटना पडता था। क्योंकि हर तरफ साधन भी नहीं जाते थे। कोई अकेले तो कुछ समूह में जाते थे।
उसी मेले में अपने बीस पच्छीस ऊंट बेचने जालोर के किसी गांव का एक युवक भी आया। उसके सारे ऊंट अच्छी नस्ल के थे। इस लिए अच्छी कीमत में सारे ऊंट दो तीन दिन में बिक गए। अकेला था और खरीदारी करनी थीं नहीं इस लिए ज्यादा रकम के साथ मेले में रुकना ठीक नहीं था। तो वह रकम लेकर वापस अपनी ढाणी लौट पड़ा। पैदल ही जाना था। रुपए कमर में अच्छी तरह से बांधकर चल पड़ा।

चलते चलते गौधूली बेला में एक ढाणी के पास पहुंचा। उसने विचार किया कि अब आगे चलना ठीक नहीं होगा क्योंकि अंधेरा हो जायेगा फिर रात में कोई ढाणी भी नजर आयेगी।
यह सोचकर उसी ढाणी में चला गया। घर से थोड़ा दूर एक झौंपा बना था, उसमें जाकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद उस घर का मालिक आ गया। उन दिनों इस तरह अनजाने लोग किसी भी ढाणी या घर में रुका करते थे। युवक से सारी जानकारी प्राप्त की तो उस अधेड़ ने उसे पहचान लिया। पर पहचान को उजागर नहीं की। बात यह थी कि युवक की उसी की बेटी से सगाई कर रखी थी। उन दिनों विवाह से पहले लड़का उस गांव में जा नहीं सकता था जिस गांव में उसकी सगाई की हुई हो। लडके को मालूम ही नहीं हुआ कि वह जिस ढाणी में ठहरा है वो उसकी ससुराल है। वरना वह हरगिज नहीं जाता। उस अधेड़ को जब मालूम हुआ कि यह मेले से जानवर बेचकर आया है और सांठ सित्तर हजार रुपये इसके पास है तो उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई। वह चाय पानी का बोलकर अपने घर में चला गया। वहां जाकर अपनी पत्नी से बात की। उसने अपनी पत्नी को अपनी योजना में शामिल कर लिया। उस दंपति के एक लड़की व एक लडका था। लडका बेटी से बड़ा था। उसको भी योजना में शामिल करने की बात की।
उसकी पत्नी ने कहा कि किसी को मालूम पड़ गया तो और बेटी का क्या होगा।

अधेड़ ने कहा कि कोई सपने में भी नहीं सोच सकते कि यह यहां आ सकता है। और रही बात बेटी की तो समाज में लडकों की कमी थोड़े ही है। किसी के भी साथ शादी कर देंगे। पागल यह तो सोच कि घर बैठे लक्ष्मी आई है। इतना पैसा मिल रहा है कि जीवन भर खपते रहेंगे तो भी कमा नहीं सकते। और फिर किसी को मालूम भी नहीं पड़ेगा।
जब पति पत्नी आपस में बातचीत कर रहे थे तब उनकी बेटी बाड के पीछे खड़ी सब सुन रही थी। उसने जब सुना तो डर गयी। उसने सोचा कि यह तो धन के लिए अंधे हो रहे हैं। उचित अनुचित को भी भूल गए हैं।
वह वहां से चुपके से निकलकर भेड़ बकरियों को बाड़े में घुसाने के बहाने से बाड़े की तरफ गयी। अंधेरा हो चुका था। लाज छोडकर सीधे झौंपे में चली गई।
लडकी को देख युवक थोड़ा सा अचकचा गया।
लड़की धीमी आवाज से जल्दी जल्दी सारी बातें बताने लगी।
उसने कहा कि जल्दी से यहां से निकल जाओ नहीं तो तुम्हें रात में मार डालेंगे।

और मैं लाज छोडकर कहने आई हूँ क्योंकि मैं वही लड़की हूँ जिससे आपकी सगाई की हुई है। मैने तो मन में आपको अपना पति मान लिया था। अब मैं आपके साथ ऐसा होते कैसे देख सकती हूँ। मेरा भाई भी उनके जैसा ही है रुपयों का लोभी हैं। वो भी इनके साथ मिल जायेगा।
अभी समय है वह घर नहीं पहुंचा है तब तक आप यहाँ से निकल जाओ।

युवक सारी बातें समझ गया। उसने कहा कि तुम चिंता मत करो। मुझे तुम पर गर्व है। अब चुपचाप घर जाओ।
थोड़ी देर बाद उसका होने वाला साला भी आ गया। मां बाप ने उसे भी अपनी योजना में शामिल कर लिया।
बाप ने बेटे को कहा कि भोजन के बाद इसे जल्दी से सुला देना। ज्यादा बातें मत करना। थका हुआ तो हैं ही जल्दी से सो जायेगा। गहरी नींद में सो जाएँ तब मुझे बुला देना। दोनों मिलकर काम तमाम कर देंगे।
भोजनोपंरात दोनों झौंपे के आगे सो गए। ठंडी हवा चल रही थी। युवक ने भी थके हुए का नाटक करते हुए कहा कि अब सुबह बातें करेंगे।बेटा उसके सोने का इंतजार करते करते स्वयं ही नींद में डूब गया।

उधर उस दंपति ने घर के पिछवाड़े में गड्ढा खोद डाला। फिर बेटे के आने की प्रतीक्षा करने लगे। जब काफी देर तक नहीं आया तो उन्होंने सोचा कि शायद बेटा घबरा गया है। वह अधेड़ स्वयं देखने आया। उसने अंधेरा तो था ही देखा तो एक जना सो रहा था। उसने विचार किया कि बेटा डर के मारे कहीं जाकर छिप गया है। वह वापस घर में गया और बड़ी एक कुल्हाड़ी ले आया।

आते ही आव देखा न ताव देखा झटके से कुल्हाड़ी का भीषण वार किया। सोए हुए युवक के दो टुकड़े कर दिए। फिर पत्नी को बुलाया और दोनों ने मिलकर लाश को बिस्तर सहित उठा लिया। उठाकर दोनों लाश को गड्ढे के पास ले गये। वहां अच्छी तरह से दफन करने हेतु प्रकाश के लिए दीया जला कर रखा था। लाश को जैसे ही नीचे रखा दीए का थोड़ा सा प्रकाश उसके चेहरे पर पड़ा।

चेहरे को देखते ही दोनों के पांव कांपने लगे। युवक की जगह लाश उनके अकेले बेटे की थी।
अब क्या करें यह ऐसे कैसे हो सकता है। वह युवक कहां गया। थोड़ी देर बाद दोनों ने फिर से एक योजना बनाई। लाश को उठाकर वापस खाट पर डाली और जोर जोर से रोने लगे। हाय हमारे इकलौते बेटे को मार डाला। हाय रे मार डाला। हमने तो उसे मेहमान समझ ठहराया और वो है कि मेरे इकलौते बेटे को मार कर भाग गया। हमने किसी का क्या बिगाड़ा था जो हमें यह फल मिला। इस तरह से दोनों नौटंकी करने लगे। रात काफी बीत चुकी थी चारों तरफ सन्नाटा पसरा था। इस कारण उनके रोने की आवाज दूर दूर सुनाई पडने लगी।

अभी तक नींद का बहाना किये सोई हुई बेटी भी दौड़कर आई। वह भी रोने लगी। तभी आसपास की ढाणियों के लोग भी दौड़ दौड़ कर आने लगे। लोग आते रहे और दोनों उस युवक का नाम ले लेकर बार बार बेटे को मारने का आरोप लगाते रहे। अरे हमने तो मेहमान को देवता समझ कर ठहराया था और उसने यह बदला चुकाया। ऐसा करते करते दिन निकल आया। बडे़ बुड्ढे भी आए। किसी ने दौड़ कर पुलिस को बताया। मर्डर केस की सुन पुलिस भी मौके पर पहुंची। तब विचार किया कि हत्यारा भागा किधर से हैं। पैरो के निशान देखकर पीछा कर पकड़ा जाएं। जब पैर देखे तो पैर बाड़े से बाहर नहीं निकल रहे थे। तभी बाड़े में खड़े विशाल नीम के पेड़ से आवाज आई कि मैं कहीं नहीं भागा हूँ। रात से ही पेड़ पर बैठकर सारा नाटक देख रहा हूँ। नीचे तो पुलिस आने के बाद उतरने का विचार था। क्योंकि लोगों में गुस्सा था और गुस्से की वजह से शायद मेरी बात का विश्वास नहीं करते। ऐसे कहते हुए युवक नीचे उतरा। उतरते ही पुलिस ने उसे अपने कब्जे में ले लिया।

जब लोगों ने पूछा कि तुने ऐसा क्यों किया। तब उस युवक ने कहा कि मैंने कुछ भी नहीं किया हैं। जो कुछ किया हैं वो इन दोनों ने किया हैं। मैं ऐसा क्यों करूंगा।
और मेरा विश्वास नहीं हैं तो इनकी बेटी को पूछो।
तब सारी सच्चाई लोगों के सामने आई। लड़की ने सारी बातें शुरू से आखिर तक बता दी। फिर दोनों ने भी अपने अपराध को स्वीकार कर लिया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। लोगों ने युवक से पूछा कि अब इस लडकी को लेकर क्या करें। इसके मां बाप तो जेल में बंद हो गये। युवक ने कहा कि यह लावारिस नहीं है मेरी पत्नी हैं। यह मेरे साथ अपने घर जायेगी। यह नहीं होती तो मैं उस गड्ढे में दफन हो गया होता अभी तक। किसी को कानों कान खबर नहीं होती। यहां का कौन सोचता। घर वाले समझते कि लड़का पैसा लेकर भाग गया है या किसी ने मार्ग में ही लूट कर ठिकाने लगा दिया हैं। पर अपनी सोची कब होती हैं होती तो ईश्वर की सोची।
इस प्रकार से एक परिवार बर्बाद हो गया चंद सिक्कों के लिए।
पसंद आने पर कुछ अपनी राय अवश्य दीजिए।
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