Mohena Kumari की अनदेखी और पुरानी तस्वीरें

Mohena Kumari
~~~~~~~श्री सद्गुरु चरण कमलेभ्यो नमः ~~~~
                           ((((((#हंस ))))))

#पाणिग्रहण_संस्कार_समारोह_श्री_सुयश_जी_महाराज 

हंस वंश में आई शुभ मंगल की बेला !
सेहरा बांध श्री सुयश जी दूल्हा बने अलबेला !!
बज रही शहनाई भवन में, श्री सुयश जी की दुल्हन मोहिना माता डोली चढ़ आने वाली हैं !
दुल्हे की माता श्री अमृता जी और दुल्हन की माता श्री रागिनीजी समधन बनने वाली हैं !!

आज राजा दशरथ बने सुयश जी के पिता सद्गुरु श्री सतपाल जी महाराज !
राजा जनक लगे मोहिनाजी के पिता रीवा रियासत बांधवेश महाराज श्री पुष्पराज !!
अपने प्यारे सुयश जी को दुल्हा बनते देख आनन्द विभोर हैं श्री विभु जी महाराज !
रीवा रियासत की एकलौती कन्या को दुल्हन रूप में देख हर्षित हो रहे भैया श्री दिव्यराज !!

दोनों हाथ उठा आशीष दे रहीं नभ से श्री जगजननी राजेश्वरी माता !
सब विघ्न दूर करें विघ्न विनाशक जगत विधाता !!
प्रकृति भी हर्षित अति, ले रही अंगराई !
दो महाराजाओं के घर बाज रही शहनाई !!

स्वर्ग बनी है आज देवभूमि उत्तराखण्ड का वैरागी कैम्प हरिद्वार !
जहाँ हो रहा श्री सुयशजी और श्री मोहिनाजी का पाणिग्रहण संस्कार !!
आज हो रहा दिव्य हंस परिवार और रीवा राजघराने का मधुर मिलन !
देश -विदेश से लाखों लोग पधारे हैं करने इस पुनीत क्षण के दर्शन !!

आज भक्तगण देख रहे अपने सद्गुरु के प्रभुता को होकर हर्षित !
बिना मुहूर्त के ये कैसा लगा कुम्भ हरिद्वार में, सब पूछ रहे होकर विस्मित !!
बारात है या जन सैलाब, जो मिलने जा रहा कौन से  सागर में सोच रहे सब होकर चकित !
कौन सी खुशियाँ मिल गई इन्हें कलयुग में जो सब हैं इतने पुलकित !!

माँ गंगा साक्षी बन रही इस सुहावनी पल की, जब सुयश जी परिणय सूत्र में बंध रहे श्री मोहिना माता के साथ !
सितारे गगन के मना रहे, आज दीर्घ हो जाय ये अलौकिक सुख वाली रात !!
वैसी बारात सज -धज कर निकली जिसमें शरीक हैं राजा  से लेकर साधु -संत !
नाचते -गाते बैण्ड बाजे के साथ अदभुत झाकियाँ प्रस्तुत करती इस अनोखी बारात का न आदि दिखे नही अन्त !!

सुन्दर रथ पे सवार मनमोहिनी दूल्हे को लोग देख -देख हो रहे निहाल !
माताएँ मंगल गान करती आशीष दे रहीं, तुम जिओ  हजारों साल !!
माता श्री आराध्याजी की जोड़ी संग में मनमोहक श्रीयांश जी भी आज सुशोभित बेमिसाल !
चहुँदिश आभा बिखेर रहा सूर्य समान श्री सद्गुरु महाराज जी के दिव्य मुकुट विराजित भाल !!

माता श्री अमृता जी सुशोभित लक्ष्मी स्वरुप में, लुटा रहीं धन -ऐश्वर्य सब भक्तगणों को आज !
सम्पूर्ण हरिद्वार, हरि -हर की नगरी में व्याम है बैकुण्ठ का साम्राज्य !!
भक्तगण आज हर्षित अति, पा रहे मनुष्य जन्म पाने का आनन्द !
जो मिले नहीं तीनो लोको में वह भक्तों को आज प्राप्त है परमानन्द !!

                 कलयुग में सतयुग का नजारा !
          चहुँदिश है प्रेम, ख़ुशी -आनन्द का पसारा !!
         हरिहर आज बैकुण्ठ से उतर हरिद्वार हैं आये !
          भक्त लूट रहे आनन्द, पर दूजा देख न पाये !!

       
















































































































































































































































































































































#हम_सबके_प्राणों_से_प्यारे_श्री_सुयश_जी_महाराज_के_परम_सुमंगलमय_विवाहोत्सव_की_लख_लख_बधाईयाँ...

देश विदेश से बधाईयाँ देते प्रेमीभक्त कर रहे जय -जयकार !!
दिव्य दर्शनों से आनंदित अपार भक्तजन देश -विदेश !
यह धन्य दिवस सुमंगलमय दशों दिशा बधावा बाज रहा !
गंगा तट पर श्री प्रेमनगर हरिद्वार में मंगल गान गूँज रहा !!
हे हंस -वंश -सुयश जी ! तुमको खुशियाँ नित मिलती रहें !
सदभावना की सुधा सरिता विश्व में सदा बहती रहे !!
ऐसी दिव्य मनोहर जोड़ी युग युग जीवे !
हंस वंश की सुधा बेल नित फले फूले !!
इतनी अगम अपार ख़ुशी कहो दिल में कैसे समाये !
जहाँ दिव्य शक्ति साकार वर -वधु सुहाये !!
समस्त भक्तों के ह्रदय में है ख़ुशी अपार !
दशों दिशाओं में हो रही है जय -जयकार !!