Income Tax Se Bacne Ke Top 13 Tarike


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अगर आप की सैलरी मोटी है। तो आप income Tax जरूर देते होगें। इसमे आप की आय का एक मोटा हिस्सा आयकर विभाग के पास चला जाता हैं। साल के अखिरी महीनों मे लोग कई तरह के जुगाड़ करने लगते। Income tax law and Rule पर रिसर्च करने लगते हैं। आप हर साल आयकर टैक्स भरते हैं तो 7आप को पता ही होगा। हमे किन किन Process से गुजरना पड़ता है।  साल में करीब दो बार Advance Tex और साल के अंत में हमे अपनी पूरी आय का ब्यौरा देना पडता है। फिर हमे Income Tax Return File करना पड़ता हैं। तब जाकर हमें छुटकारा मिलता हैं। ये सब करने के बाद हम सोचते है कि हमें 
किसी तरह टैक्स से छुटकारा मिल जाये या किसी तरह टैक्स को कम किया जा सके। तो आज हम इसी बारे मे बात करेंगे। कि कैसे आप कानून के दायरें मे रह कर टैक्स को कम कर सकते हैं। आयकर विभाग की नियम और कानून का पालन करते हुए आयकर विभाग से आयकर मे छूूूट पा सकते हैं। ज्यादातर लोगों को 80C के तहत 1.5 लाख का डिडक्शन दिखता है।  इसके अलावा भी कई और तरीक़े है जिनकी मदद से आयकर Tax को बचाया जा सकता है। 

1. Rent Clips :- 


कोई व्यक्ति जो Self Employed है। जैसे होम ट्यूशन , बिजनेस करता है या कुछ और करता है। तो उसके लिए सेक्शन 80GG है। जिनके सैलरी Stacker मे  HRA नही है। वो इनकम टैक्स एक्ट सेक्शन 80GG का लाभ उठा सकते है।

अगर सालाना सैलरी का 10℅  रेंट मे दिया जा रहा है तो फायदा मिलेगा। इस का नियम भी HRA की तरह ही होता हैं।

2. Home Loan aur Rent Clips  ka Matter kya hai?

वैसे तो लोगों को लगता हैं कि अगर वो रेंट रसीद लगा रहें है तो होम लोन interest मे टैक्स बेनिफिट नही ले सकते। ऐसा है भी या तो कोई टैक्स बचाने के लिए होम लोन के Dcoments लगा सकते है। या फिर सिर्फ रेंट रसीद , लेकिन छूट सिर्फ उन लोगों को मिलता हैं जिनका अपना घर तो है। लेकिन job करने के लिए वो किसी दूसरे शहर मे रेंट पर रहते है। ऐसे मे वो व्यक्ति होम लोन और रेंट रसीद दोनो का फायदा उठा सकता है।

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3. पढा़ई के लिए लोन 


अगर किसी व्यक्ति ने अच्छी पढा़ई के लिए लोन  लिया है तो वह Interest के लिए इनकम टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकते है। ये सेक्शन 80 E के तहत होगा। ये सिर्फ खुद के लिए नहीं ब्लकि अपने किसी रिश्तेदार के लिए भी वैलिड है। जो आप पर निर्भर हैं। ये डिडक्शन लोन रिपेमेंट शुरू होने के 8 साल तक ही क्लेम किया जा सकता है।


 4. डोनेशन या चैरिटी 

ये डिडक्शन लोग इस लिए भूल जाते क्योंकि 80 G के तहत होने वाला ये डिडक्शन Investment Proof जमा करने के दौरान नही होता हैं। जिस तरह के चैरिटेबल मे पैसा डोनेट किया जायेगा। उसी तरह का डिडक्शन होगा। यह डिडक्शन 50℅ से लेकर 100℅ रकम का होता हैं। जो दान की गई।

5. विकलांगता के आधार पर 

विकलांगता के आधार पर सेक्शन 80 U के तहत कोई इंसान टैक्स डिडक्शन क्लेम कर सकता हैं। ये 750000 से लेकर 125000 तक होता हैं। ये इस आधार पर तय किया जाता हैं कि विकलांगता किस स्तर पर है।

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6. बच्चों की फीस 

स्कूल, कालेज और ट्यूशन की फीस की रसीद भी टैक्स से बचाने में काम आ सकती हैं। ये भी 80 C के तहत फाइल किया जाता हैं।

7. मेडिकल बिल 

I T Act कुछ खास बीमारियों के लिए भी टैक्स डिडक्शन की सुविधा उपलब्ध कराता है। इसके लिए सेेेक्शन 80DDB मे अप्लाई किया जा सकता हैं। जिन
बीमारियों के लिए डिडक्शन होता हैं वो रुल 11 DD के तहत बताई जाती हैं। इसके तहत 40 हाजार तक का डिडक्शन हो सकता हैं। अगर सीनियर सिटीजन हो या सुपर सीनियर सिटीजन हो तो 60-80 हाजार तक डिडक्शन हो सकता हैं।

8. सेविंग अकाउंट का डिडक्शन 

लगभग सभी टैक्स देने वालों के पास एक या एक से अधिक सेविंग अकाउंट होता हैं। लेकिन ये बात बहुत कम लोगों को ही पता होता हैं कि 80 TTA के तहत टैक्स सेविंग बैंक इंटेरेस्ट पर भी बचाया जा सकता हैं।

9. होम लोन पर इंटेरेस्ट 

होम लोन के इंटरेस्ट पर टैक्स डिडक्शन क्लेम किया जा सकता हैं। ये टैक्स बेनिफिट सेक्शन 24 के तहत आता है। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये डिडक्शन सिर्फ होम लोन के लिए है।

अगर रेंट मिल रहा है आपको अगर आप के पास कोई घर है और आप ने उसे रेंट पर दिया है फिर ना तो रेंट रसीद काम आयेगी और ना ही होम लोन काम आयेगा।

10. घर मरम्मत के लिए लोन


लोगों को सेक्शन 80 EE , 80 C और   24 के बारे मे पता होता है। पर लोग अक्सर ये नही देखते कि घर की मरम्मत के लिए लिये गए लोन पर भी डिडक्शन मिलता हैं। ये सेक्शन 24 B के तहत आता हैं। इसमे 30 हाजार तक का डिडक्शन मान्य है।

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तो दोस्तो ये Income Tax विभाग के कुछ नियम और कानून थे। इनका लाभ उठा कर आप भी टैक्स में छूट पा सकते है। आम नागरिक को इन income Tax से सम्बंधित इन कानूनों की सही जानकारी नही होतीं हैं। जिस कारण वो इस लाभ से वंचित रह जाते हैं। परन्तु अब ऐसा नही होगा। अब आप इनका लाभ उठा कर इनकम टैक्स के बोझ को कम कर सकते है।

11. शादी / विवाह मे मिले गिफ्ट्स

शादी विवाह मे मिले गिफ्ट्स पर आप को कोई टैक्स नही देना पडता। बशर्ते ये गिफ्ट्स आप को शादी की डेट के आसपास मिले होने चाहिए और इन गिफ्ट्स की कीमत 50,000 से कम होना चाहिए। अगर इन गिफ्ट्स की कीमत 50,000 से ज्यादा होगीं तो ये भी टैक्स के दायरे मे आ जायेंगे।

12. Partnership के रूप मे मिला Profit


अगर आप किसी फर्म मे Partner है तो Share Of Profit के रुप मे मिला आप का हिस्सा टैक्स देनदारी से मुक्त होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इस पर कम्पनी पहले ही टैक्स पे कर चुकी है। यह ध्यान रखे कि आप को टैक्स की छूट सिर्फ आप के Profit फर मिलेगा। आप को मिलने वाली सैलरी पर नही।


13. सुकन्या समृद्धि योजना खाता

सुकन्या समृद्धि योजना के अन्तर्गत खोल गये Account पर भी आप को सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन का फायदा मिलता हैं। आप पोस्ट आफिस में अपने 2 बेटियों के नाम सुकन्या समृद्धि योजना के तहत Account खुलवा सकते है।

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